63. Wuzu karne ka tareeqa Hadith ki roshni mein

(Page No.63)

    Wuzu karne ka tareeqa Hadith ki roshni mein-


उस्मान बिन अफ्फान रदी अल्लाहू अन्हु ने वज़ु का पानी मँगवाया और वज़ु किया तो ( बिस्मिल्लाह पढ़ कर) पहले दोनो हाथों को (कलाई तक) तीन बार धोया फिर 
( तीन बार) कुल्ली की और नाक में पानी डाला और उसके बाद तीन बार मुँह धोया और फिर दाहिना हाथ कोहनी तक तीन बार धोया और उसके बाद बायाँ हाथ कोहनी तक तीन बार धोया , फिर सिर का मसा किया और फिर दाहिना पाँव (टखनों तक) धोया तीन बार और फिर बायाँ पाँव धोया तीन बार और उसके बाद कहा की मैने रसूल-अल्लाह सललल्लाहू अलैही वसल्लम को देखा की आपने इसी तरह वज़ु किया जैसा मैने अभी किया और फिर आप सललल्लाहू अलैही वसल्लम ने इस तरह वज़ु करने के बाद फरमाया था की जो शख्स मेरे वज़ु की तरह वज़ु करे फिर 2 रकात (नवाफिल) खड़े होकर पढ़े और किसी ख़याल में गर्क़ ना हो ( यानि दिल में फालतू ख्याल लाये) तो उसके पिछले सारे गुनाह बखस दिए जाएँगे इब्न शिहाब ने कहा की हमारे उलमा कहते हैं ये वज़ु सारे वज़ु में पूरा है जो नमाज़ के लिए किया जाए
सही मुस्लिम, जिल्द 1, 538
नोट : वुज़ू करते वक़्त गर्दन का मसा किसी भी सही हदीस से साबित नहीं है

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*_अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम।  के सदके इसी तरह इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।_*

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आमीन//




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